कृष्ण और राधा की होली: प्रेम, भक्ति और रंगों का दिव्य उत्सव
🌸 कृष्ण और राधा की होली प्रेम, भक्ति और रंगों का अलौकिक संगम भारत के प्रमुख त्योहारों में होली को आनंद, उल्लास और आपसी प्रेम का पर्व माना जाता है। लेकिन जब होली को भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से जोड़ा जाता है, तब यह पर्व केवल रंगों का नहीं रह जाता, बल्कि दिव्य प्रेम, भक्ति और आत्मिक आनंद का प्रतीक बन जाता है। ब्रजभूमि में मनाई जाने वाली राधा-कृष्ण की होली आज भी भारत की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध परंपराओं में गिनी जाती है। 📜 कृष्ण और राधा की होली का पौराणिक इतिहास पौराणिक कथाओं के अनुसार, बालकृष्ण का रंग सांवला था। उन्हें यह चिंता रहती थी कि राधा रानी उनसे अलग क्यों दिखती हैं। जब उन्होंने यह बात माता यशोदा से कही, तो माता ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे राधा के चेहरे पर रंग लगा सकते हैं। यही सरल और मासूम घटना आगे चलकर होली की परंपरा का आधार बनी। यह कथा बताती है कि होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि भेदभाव मिटाने और प्रेम को समानता देने का पर्व है। 💙 राधा-कृष्ण का दिव्य प्रेम और होली राधा और कृष्ण का प्रेम सांसारिक आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा का मिलन माना जाता है। उनकी होली म...