पूर्णिमा और चंद्रमा का आध्यात्मिक संबंध: मन और चेतना का रहस्य
🌕 पूर्णिमा और चंद्रमा का आध्यात्मिक संबंध मन, चेतना और ब्रह्मांड के बीच दिव्य संवाद 🔱 भूमिका सनातन धर्म में चंद्रमा को केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि मन, भावनाओं और चेतना का अधिपति माना गया है। वहीं पूर्णिमा वह पावन तिथि है जब चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं के साथ आकाश में प्रकाशित होता है। यह समय केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण, साधना और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर माना जाता है। पूर्णिमा और चंद्रमा का संबंध हमारे मन, विचार, भाव और आध्यात्मिक उन्नति से गहराई से जुड़ा हुआ है। 🌙 चंद्रमा का आध्यात्मिक महत्व वैदिक शास्त्रों में चंद्रमा को— मन का कारक ग्रह शीतलता और शांति का प्रतीक अमृत और जीवन ऊर्जा का स्रोत माना गया है। कहा जाता है कि जैसे सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है, वैसे ही चंद्रमा मन का प्रतिनिधि है। 🌕 पूर्णिमा क्या है? जब चंद्रमा सूर्य के ठीक सामने आकर अपनी पूरी रोशनी पृथ्वी की ओर देता है, तब वह पूर्णिमा कहलाता है। यह शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि होती है और इसे पूर्णता, प्रकाश और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। 🧠 चंद्रमा और मन का संबंध आध्यात्मिक ग्रंथों के अनुसार— चं...