महाशिवरात्रि और नीलकंठ महादेव की कथा: समुद्र मंथन, हलाहल विष और शिव की करुणा
महाशिवरात्रि और नीलकंठ महादेव की कथा महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। यह दिन भगवान शिव की उपासना, तपस्या और दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है। महाशिवरात्रि के साथ जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएँ हैं, जिनमें से एक अत्यंत महत्वपूर्ण कथा है – नीलकंठ महादेव की कथा , जो समुद्र मंथन से संबंधित है। यह कथा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टि से भी अत्यंत गहरी है। यह हमें त्याग, धैर्य और लोककल्याण का संदेश देती है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा पुराणों के अनुसार एक समय देवता और असुर दोनों अमरत्व प्राप्त करने के लिए अमृत की खोज में थे। भगवान विष्णु के सुझाव पर उन्होंने क्षीर सागर का मंथन करने का निर्णय लिया। मंथन के लिए: मंदराचल पर्वत को मथनी बनाया गया वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण कर पर्वत को सहारा दिया जब समुद्र मंथन शुरू हुआ, तब सबसे पहले अमृत नहीं बल्कि एक भयंकर विष निकला जिसे हलाहल विष कहा गया। हलाहल विष और सृष्टि संकट हलाहल विष इतना घातक था कि उसकी गर्मी और विषाक्तता से ती...