लठमार होली का इतिहास: बरसाना और नंदगांव की अनोखी परंपरा
🪔 लठमार होली का इतिहास: भक्ति, परंपरा और प्रेम का उत्सव भारत में होली केवल रंगों का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में होली को विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बरसाना और नंदगांव की लठमार होली विश्वभर में अपनी अनोखी शैली के लिए प्रसिद्ध है। इस होली में रंगों के साथ-साथ लाठियों की प्रतीकात्मक मार और भक्तिमय उल्लास देखने को मिलता है। 🌸 लठमार होली क्या है? लठमार होली एक पारंपरिक होली उत्सव है, जो भगवान कृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। इस होली में बरसाना की महिलाएं, जिन्हें हुरियारिन कहा जाता है, नंदगांव से आए पुरुषों ( हुरियारे ) को प्रतीकात्मक रूप से लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल लेकर स्वयं को बचाते हैं। यह सब हंसी-मजाक, गीत-संगीत और भक्ति के वातावरण में होता है। 📜 लठमार होली का पौराणिक इतिहास लठमार होली की जड़ें द्वापर युग से जुड़ी मानी जाती हैं। मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना आए थे और राधा व गोपियों के साथ रंग-गुलाल खेलने लगे। कृष्ण की शरारतों से नाराज होकर गो...